जूनी इंदौर के 1200वर्ष प्राचीन गणेश जो मोबाइल भी सुनते हैं!!(डॉ प्रदीपसिंह राव)।
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जूनी इंदौर के 1200वर्ष प्राचीन गणेश जो मोबाइल भी सुनते हैं!!(डॉ प्रदीपसिंह राव)।
Update24c.in:-
रतलाम । होलकर घराने के दस्तावेजों,मालवा अखबार,नई दुनिया,वेब दुनिया,आजतक,ई टीवी और इंदौर के सांस्कृतिक इतिहास पर किए गए रिसर्च में होलकर स्टेट के जमाने से यहां श्री गणेश को श्रद्धा और उत्सव के साथ पूजने से समृद्धि रही है।
फिर लोकमान्य तिलक के महाराष्ट्र के गणेश लोक उत्सव ने तो इंदौर पर सीधा प्रभाव डाला था।महाराष्ट्रियन् समाज की बहुतायत होने से गणेश उत्सव का अतिरिक्त महत्व इंदौर में रहा है।लोक जागरुकता में इस उत्सव की विशेष भूमिका रही है। गणेश विसर्जन मिल श्रमिकों का ग्रामीणों का ऐतिहासिक उत्सव रहता था जो मिलों के अवसान के साथ ही अब औपचारिक उत्सव बन कर रह गया है।
जूनी इंदौर का गणेश मंदिर संभवत सबसे ज्यादा प्राचीन:-

इंदौर के चारों ओर श्री गणेश की आभा मिलती है।इतिहासकारों के लेखों में जूनी इंदौर स्थित गणेश मंदिर संभवतः इंदौर का सबसे प्राचीन मंदिर है।सरस्वती नदी(अब विलुप्त) के पूर्वी तट पर एक ऊंचे टीले पर यह मंदिर बना था।यहां से प्राप्त शिलालेखों से पता चलता है कि परमार कालीन देवालय है,जो 9वि से 12वि सदी में बना फिर होलकरों के पर्याप्त संरक्षण से सुरक्षित रहा।यहां मिले मोड़ी भाषा में लिखे पत्रों में इसका इतिहास जाना गया,श्री भालचंद पाठक पुजारी के पास से ये पत्र मिले थे। 1759के एक पत्र में लिखा था कि इस मंदिर की देखरेख के लिए तत्कालीन इंदौर परगने के कामाविस्दार (मुख्य प्रशासनिक और राजस्व अधिकारी)को निर्देश दिए गए थे कि पुजारी भट्ट को पीपल्यारव,अब पीपल्यापाला के समीप 50बीघा जमीन धर्मार्थ दी जाए।ताकि मंदिर की देखरेख और पुजारी का जीवन व्यापम हो सके।मल्हारराव की धर्मपत्नी द्वारा 1760में पत्र लिख कर आदेश दिया था कि जूनी इंदौर स्थित गणेश मंदिर में प्रतिमाह आधा सेर सिंदूर और पैने सेर घी दिया जाए।इसे कई पत्र धरोहर के रूप में मिले जिनमें होलकरों द्वारा उस मंदिर के संरक्षण का उल्लेख मिलता है। उल्लेखनीय है कि इंदौर में तब सांप्रदायिक एकता इतनी थी कि मुस्लिम धर्मावलंबी भी मंदिर के लिए दान देते थे।इतिहास साक्षी है जिसमें अहिल्या बाई होलकर ने 10मई 1785 को पत्र लिख कर जूनी इंदौर मंदिर की पूजा के लिए हर माह 40/रुपए दिए जाते थे। होलकर राजा तुकोजीराव ने संरक्षण जारी रखा था।
भादो मास में होता है उत्सव:-

भादो मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को इस अतिप्राचीन मंदिर में उत्सव मनाने की परंपरा है,जो आज तक यथावत है। इस मंदिर क मोबाइल और चिट्ठी वाले गणेश भी बोला जाता है,जो देश विदेश तक प्रसिद्ध है,पंडित जी के पास मो आते हैं और वे गणेश जी के कान में लगा कर भक्त की मन्नत सुनते हैं।जूनी इंदौर मंदिर 1200,वर्ष पुराना है, खजराना मंदिर 1735में होलकर वंश,अहिल्या बाई होलकर ने मुगलों के आक्रमण के भी से छुपाई गई इस मूर्ति को कुएं से निकलवा कर स्थापित करवाया था।।जबकि बड़ा गणपति 1875में एक पंडित नारायण दाधीच के स्वप्न के आधार पर बना।तीनों ही मंदिरों की प्रसिद्धि आज बढ़ती जा रही है।शुभ कार्यों का श्री गणेश इन्हीं मंदिरों में सदियों से होता चला आ रहा है।