मंदसौर जिले के छात्रावासों में बेटियों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ का आरोप
Hindi news/ latest news/crime news/ halchal/khaber/taja khaber/update news
मंदसौर जिले के छात्रावासों में बेटियों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ का आरोप
भीम आर्मी जय भीम संगठन सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों ने निष्पक्ष जांच की मांग
Update24x.in:-
मंदसौर। भीम आर्मी जय भीम संगठन एवं विभिन्न सामाजिक संगठनों ने मंदसौर जिले के कुछ शासकीय छात्रावासों की व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
संगठनों का आरोप है कि जिले के कुछ छात्रावासों में छात्र-छात्राओं, विशेष रूप से छात्राओं को घटिया गुणवत्ता एवं सड़ा-गला भोजन परोसे जाने जैसी गंभीर शिकायतें सामने आ रही हैं, जिससे उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है। उनका कहना है कि छात्रावासों में विद्यार्थियों को शासन द्वारा निर्धारित मानकों के अनुरूप पौष्टिक एवं गुणवत्तापूर्ण भोजन, स्वच्छ वातावरण तथा सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
धमकी की निंदा:-
संगठनों के पदाधिकारियों के अनुसार, वे सामाजिक दायित्व के तहत छात्रावासों की व्यवस्थाओं का जायजा लेने पहुंचे थे, लेकिन सहयोग मिलने के बजाय संबंधित अधिकारी/वार्डन द्वारा झूठे मामलों में फंसाने की धमकी दिए जाने का आरोप लगाया गया है। संगठनों का यह भी आरोप है कि छात्र-छात्राओं के हितों और उनके अधिकारों की बात करने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं संगठन के पदाधिकारियों को थाने में झूठी रिपोर्ट दर्ज कराने तक की धमकियां दी जा रही हैं। संगठनों ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की है।

संगठनों का कहना है कि शासकीय छात्रावास किसी व्यक्ति की निजी जागीर नहीं हैं, बल्कि जनता के करों से संचालित संस्थान हैं। इसलिए वहां की व्यवस्थाओं की पारदर्शिता बनाए रखना तथा जनता के प्रति जवाबदेह रहना संबंधित अधिकारियों का दायित्व है। उन्होंने कहा कि भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को जनहित के मुद्दों पर आवाज उठाने का अधिकार देता है।
संगठनों ने सवाल उठाया कि क्या विद्यार्थियों के हक और अधिकारों की बात करना अब अपराध हो गया है? क्या देश में अपने संवैधानिक अधिकारों की मांग करना भी गुनाह हो गया है? उनका कहना है कि यदि देश के भविष्य माने जाने वाले छात्र-छात्राओं के स्वास्थ्य, शिक्षा और मूलभूत सुविधाओं से जुड़े मुद्दे उठाने वाले सामाजिक संगठनों को झूठे मामलों में फंसाने की धमकियां देकर दबाने का प्रयास किया जाएगा, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था और संविधान की भावना के विपरीत होगा। जब देश के भविष्य अर्थात छात्र-छात्राओं के साथ ही इस प्रकार की लापरवाही होगी, तो एक सुरक्षित, शिक्षित और उज्ज्वल भारत की कल्पना कैसे की जा सकती है।
संगठनों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच कराई जाए तथा जांच दल में केवल प्रशासनिक अधिकारियों को ही नहीं, बल्कि छात्र-छात्राओं के अभिभावकों एवं पालकों के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाए, ताकि जांच पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष हो सके।
इसके साथ ही संगठनों ने सुझाव दिया है कि प्रत्येक माह छात्रावासों में दिए जाने वाले विशेष भोजन के अवसर पर अभिभावकों एवं पालकों को भी आमंत्रित किया जाए। उन्हें भोजन की गुणवत्ता का प्रत्यक्ष निरीक्षण करने का अवसर मिले तथा छात्रावास में उपलब्ध भोजन व्यवस्था, आवास, स्वच्छता, सुरक्षा एवं शासन द्वारा प्रदान की जाने वाली अन्य सभी सुविधाओं की विस्तृत जानकारी दी जाए। इससे छात्रावासों में मिलने वाली सुविधाओं की वास्तविक स्थिति सामने आएगी तथा व्यवस्थाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी।
निष्पक्ष जांच की मांग:-
संगठनों ने मांग की है कि यदि जांच में किसी भी प्रकार की अनियमितता, लापरवाही, भ्रष्टाचार अथवा विद्यार्थियों के अधिकारों के साथ खिलवाड़ सामने आता है, तो संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाए। साथ ही यदि सामाजिक कार्यकर्ताओं को झूठे मामलों में फंसाने या धमकाने का प्रयास किया गया हो, तो उसकी भी निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
वरना 30 जुलाई को करेंगे आंदोलन:-
संगठनों ने स्पष्ट किया है कि यदि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध उचित कार्रवाई नहीं की गई, तो भीम आर्मी जय भीम संगठन एवं अन्य सामाजिक संगठन संयुक्त रूप से लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से व्यापक जनआंदोलन करेंगे, जिसकी समस्त जिम्मेदारी संबंधित प्रशासन की होगी।