Upi उलझता आर्थिक मुद्दा ,समझदारी ही समाधान है (डॉ प्रदीपसिंह राव)।
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Upi उलझता आर्थिक मुद्दा ,समझदारी ही समाधान है (डॉ प्रदीपसिंह राव)।
Update24x.in:-
रतलाम। unifide Payments interface (UPI) जिसे NPCIद्वारा 2016से शुरू की गई डिजिटल पेमेंट प्रणाली है। NPCI का अर्थ "नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया" है। यह भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम है। इस भुगतान प्रणाली upi से भारत में हर माह 16अरब का लेनदेन होता है,यह दुनिया का सबसे बड़ा रियल टाईम पेमेंट सिस्टम है। भारत ने सिर्फ 10 वर्ष में डिजिटल पेमेंट के विश्व कीर्तिमान बना दिए।इसके लिए ग्राहक और व्यापारी से कोई शुल्क नहीं लगता था । सारा खर्च सरकार और बैंक उठा रहे थे।अचानक नया मोड़ आने से जन सामान्य का हतप्रभ होना स्वाभाविक है।अब यह प्रस्ताव आया है कि 2000 रुपये के ऊपर यू पी आई पेमेंट पर 0.4MDR लगेगा।इसका अर्थ है,मर्चेंट डिस्काउंट रेट यह वह सेवा प्रभार है जो व्यापारी ग्राहक के upi पेमेंट बदले बैंक या पेमेंट प्रोसेसर को देगा। उदाहरण 5000/पर 20रु कटेगा। बैंक का कहना है कि upi का इंफ्रास्ट्रक्चर,सर्वर और फ्रॉड की रोकथाम पर खर्च अधिक हो रहा है,इसलिए बिना सेवा प्रभार के इसे चला पाना मुश्किल होगा। व्यापारियों का विरोध इसलिए बढ़ रहा है कि छोटे व्यापारियों पर बोझ बढ़ेगा।यदि व्यापारी upi से भुगतान लेना बंद कर देंगे,तो ग्राहक परेशान होंगे और बैंकों के हालात पर असर पड़ेगा।
इंदौर में no upi day" :-

मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में विरोध की शुरुआत हो चुकी है।।इंदौर में व्यापारियों ने "no upi day"घोषित कर एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल कर दी उन्होंने राजबाड़ा पर अपने QR कोड बॉक्स रख कर चेतावनी दी है कि मांगे पूरी न होने पर आगामी 15अक्टूम्बर से 2000 रुपए से अधिक का भुगतान कैश में लेंगे,upi से नहीं। यह चिंताजनक स्थित इसलिए है,की पहले मुफ्त की आदत डाल दी और अब शुल्क क्यों???सरकार इसका समाधान निकाल सकती है।व्यापारियों के संगठन के साथ शांति से बात करें और आर्थिक विशेषज्ञों की सलाह के बाद ही कदम उठाएं।बैंक की परेशानी का हल निकालना भी जरूरी होगा।
छोटे व्यापारी होंगे परेशान :-

सेवा प्रभार सीधे न ले कर 2000/से 50000/तक की आवक पर 0.2%, 50000से ऊपर के लिए 0.4% शुल्क को इनकम टैक्स से ले। छोटे व्यापारी को MDR से मुक्त रखें।जिनका 40लाख रुपए सालाना का टर्न ओवर है।या सब्सिडी दे कर 50% MDR सरकार भरे।कैशलेस बंद करना उचित नहीं होगा,ग्राहकों को अभी से मानसिक तनाव है,उन पर नकारात्मक प्रभाव है कि सरकार नोट बंदी जैसा प्रयोग कर रही है। डिजिटल खर्च को बिजनेस लागत से जोड़ना चाहिए।ऐसा कुछ नहीं है कि कोई भारी आर्थिक अड़चन आ गई है।इस तरह की घोषणा में कुछ संयम बरतना चाहिए था।"समझदारी ही इसका समाधान 'है।बैंक सबसे पहले अपने ग्राहकों को विश्वास में लें कि उन पर किसी प्रकार का कोई संकट नहीं आ रहा है।दूसरी ओर व्यापारियों को इसका उचित समाधान समझाये।