स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजनांतर्गत स्पष्ट एवं तार्किक विभागीय कार्य-विभाजन की मांग
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पटवारी संघ ने दिखाई ताकत,,,,
स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजनांतर्गत स्पष्ट एवं तार्किक विभागीय कार्य-विभाजन की मांग
अपनी मांग को लेकर संघ ने सौंपा ज्ञापन.....
Update24x.in:-
रतलाम। स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन-2026 योजना में पटवारी संवर्ग को निष्पादक बनाए जाने के विरोध में आज पूरे प्रदेश में पटवारी संघ द्वारा एक साथ विरोध दर्ज कराते हुए सभी जिलों में शासन के नाम ज्ञापन सौंपे गए।
इसी क्रम में रतलाम जिले में भी जिला पटवारी संघ द्वारा ज्ञापन प्रस्तुत किया गया। मध्यप्रदेश पटवारी संघ, जिला रतलाम के जिलाध्यक्ष गोपाल रावत के नेतृत्व में मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर रतलाम के माध्यम से ज्ञापन सौंपकर “स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन-2026” योजना के अंतर्गत निष्पादन, e-KYC, पंजीयन एवं उससे जुड़े व्यक्तिगत दायित्व वाले कार्यों से पटवारी संवर्ग को पृथक रखे जाने की मांग की गई।
योजना का विरोध नहीं बल्कि,,,,,,,

जिलाध्यक्ष गोपाल रावत ने कहा कि पटवारी संघ स्वामित्व योजना के विरोध में नहीं है, बल्कि योजना के कार्यों में स्पष्ट एवं तार्किक विभागीय कार्य-विभाजन की मांग कर रहा है। ग्रामीण आबादी की भूमि की प्रकृति सामान्य राजस्व भूमि से भिन्न है। योजना के अंतर्गत पटवारियों द्वारा आवश्यक राजस्व एवं तकनीकी सहयोग दिया जा सकता है, लेकिन निष्पादन एवं पंजीयन का व्यक्तिगत कानूनी दायित्व पटवारी पर डालना उचित नहीं है
संघ ने कहा कि पटवारी को योजना का “निष्पादक” बनाए जाने से पंजीयन दस्तावेजों में उसका नाम, पद एवं पहचान संबंधी विवरण दर्ज होगा। भविष्य में सीमा, क्षेत्रफल, पहचान अथवा अभिलेख संबंधी विवाद उत्पन्न होने पर पटवारी को व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी ठहराए जाने की आशंका है। ऐसे में इस प्रकार के व्यक्तिगत दायित्व से पटवारी संवर्ग को मुक्त रखा जाना आवश्यक है।
ज्ञापन में कई मांगे रखी:-

ज्ञापन में Farmer ID एवं Geo Tag गिरदावरी से संबंधित कार्यों में आ रही तकनीकी एवं व्यावहारिक समस्याओं का भी उल्लेख करते हुए शासन से स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने तथा पटवारियों पर अनावश्यक अतिरिक्त कार्यभार नहीं डालने की मांग की गई। साथ ही लंबित वेतन विसंगति, ग्रेड-पे एवं कैडर रिव्यू सहित प्रमुख सेवा संबंधी समस्याओं के स्थायी निराकरण की मांग भी उठाई गई।
जिलाध्यक्ष गोपाल रावत ने शासन से आग्रह किया कि 15 सितंबर 2026 के बाद स्वामित्व योजना के निष्पादन एवं पंजीयन संबंधी कार्यों में पटवारियों को बाध्य नहीं किया जाए तथा उनकी भूमिका को केवल आवश्यक राजस्व एवं तकनीकी सहयोग तक सीमित रखा जाए। साथ ही कार्यों का स्पष्ट विभागीय विभाजन कर पटवारियों को व्यक्तिगत कानूनी दायित्व से मुक्त किया जाए। इस अवसर पर जिले की सभी तहसील इकाइयों के अध्यक्षों सहित बड़ी संख्या में पटवारी उपस्थित रहे।