"ट्रंप कीआत्म मुग्धता ही बनी उनका आत्मघात"(डॉ प्रदीपसिंह राव वरिष्ठ अंतर्राष्ट्रीय राजनीतिक विश्लेषक)।
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"ट्रंप कीआत्म मुग्धता ही बनी उनका आत्मघात"(डॉ प्रदीपसिंह राव वरिष्ठ अंतर्राष्ट्रीय राजनीतिक विश्लेषक)।
Update24x.in:-
रतलाम। "बड़ा अधिकार दच्छ जब पावा! अति अभिनामू ह्रदयं तब आवा!"। "नहीं कोऊ आ जन्मा जग माही।प्रभुता पाइ जाहि मद नाही।।" अर्थात ,इस संसार में ऐसा कोई मनुष्य जन्मा नहीं ,जिसे बड़ा पद ,अधिकार या सत्ता पर अहंकार ,घमंड न आया हो।(तुलसीदास जी)।

पूरा संसार देख रहा है कि अमरीका के आत्ममुग्ध राष्ट्रपति ट्रंप अर्श से फर्श पर धड़ाम हो गए हैं।सारी हेकड़ी मिड टर्म,मध्यावधि जनमत संग्रह में निकल आई । वो ट्रंप जो निर्दोष देशों के लिये हिटलर बन गए थे और शांति का नोबल पुरस्कार भी लेना चाहते थे। उनका मानमर्दन होने में क्या समय लगा।

ट्रंप की अहंकारीता के आदेश ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मदुरो को उनकी पत्नी के साथ बंदी बना कर उठा लिया।मनमाने टेरिफ लगाकर भारत सहित कई देशों से सम्बन्ध बिगाड़े,पूरे विश्व की अर्थ व्यवस्था को असंतुलित कर डाला,इजराइल के साथ मिल कर ईरान पर बेरहमी से लगातार हमले किए, मध्यपूर्व के देशों को संकट में डाला,रक्षा बजट बिगड़ा,दुनिया तेल के लिए तरस गई, होर्मूज , जो खुला रहता था,ट्रंप के कारण बंद हो गया,तेल के दामों में ऐतिहासिक वृद्धि के कारण विश्व व्यापार टूट गया,रूस का रातोंरात व्यापार बढ़ गया, चीन का प्रभाव और बढ़ गया, नाटो देश तटस्थ हो गए,इजराइल नेतनयाहू के जातिवाद, नस्लीय धर्मांधता में अमेरिका ने वैश्विक समरसता को भुला दिया ,अमरीका में महंगाई बढ़ी,किसानों में हताशा थी,अवैध प्रवासी के नाम पर कठोर इमिग्रेशन नीति भारी पड़ी,नौकरियों में छटनी भारी पड़ी,,,,,!! अहम्म् ब्रह्मासमी !!!!

मै ही ब्रह्मा हु, कि अहंकारी तानाशाही ने ट्रंप को दो वर्ष में ही शक्तिहीन बना दिया।प्रतिनिधि सभा और सीनेट ,संसद के दोनों ही सदनों में बहुमत खो देने के बाद उनकी प्रतिष्ठा ही अल्पमत में चली गई है।ईरान के सैकड़ों निर्दोष स्कूली बच्चों की जान लेने वाले ट्रंप को नन्ही आत्माओं का श्राप लगा है।

एक सनकी बादशाह,बात बात में पलटने वाले, झूठे, अपरिपक्व व्यक्ति के रूप में हिटलर की तरह ट्रंप को अमेरिका हमेशा "हिकारत" की नज़र से याद करता रहेगा। वो अमरीका की राजनीति के काले अध्याय बन गए हैं, उन्होंने अपनी ही पार्टी को डुबो के रख दिया। अगले दो वर्ष उनके लिए पल- पल भारी पड़ेंगे,किसी देश में उनकी इज्जत के साथ अगवानी नहीं होगी। अब वो कभी राष्ट्रपति का चुनाव न लड़ सकेंगे। उनके पास खोखले 'वीटो के अतिरिक्त कुछ भी नहीं है।अमेरिका के लिए वियतनाम से लेकर ईरान तक कोई भी युद्ध हितकारी न रहे।अशुभ और बरबादी के कारण बने। ईरान से युद्ध ने उनको निष्कृष्ट बना दिया । महाशक्ति बने इस देश से सकारात्मक सोच की अपेक्षा दुनिया रखती है।नकारात्मक हिंसक, मानसिकता किसी भी देश और सत्ताधारी को ज़मीदोज़ कर देती है।इतिहास उसका साक्षी है।अपनी शक्ति को समझदारी के आचरण की सौम्यता में ढालना ही विश्व विजय का मार्ग है। एक आदर्शवादी कूटनीतिक शासक को किसी देश की भूमि नहीं,उनके दिल जीतना चाहिए।