तेल संकट से सारी दुनिया में हाहाकार(डॉ प्रदीपसिंह राव, वरिष्ठ अंतर्राष्ट्रीय राजनीतिक विश्लेषक)
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तेल संकट से सारी दुनिया में हाहाकार(डॉ प्रदीपसिंह राव, वरिष्ठ अंतर्राष्ट्रीय राजनीतिक विश्लेषक)
Update24x.in:-
रतलाम । ईरान अमरीका युद्ध हर पल भयावह स्थिति पैदा हो रही है। इस बीच ईरान में जूनियर खोमनेई की ताजपोशी हो चुकी है।पश्चिम एशिया उद्देश्य से भटक गया है।परमाणु ठिकाने के विरुद्ध शुरू हुई इस जंग में तेल भंडारों और रिफाइनरी पर भयंकर हमले होने लगे हैं।ईरान धुंआ धुंआ हो रहा है और पूरी दुनिया के सामने तेल संकट खड़ा हो गया है। तेजाबी बारिश हो रही है।पर्यावरण इतना दूषित हो गया है कि मिडिल ईस्ट में जन जीवन और पशु पक्षियों पर दुष्प्रभाव पड़ रहा है। इस युद्ध में मानवीयता को भी ताक पर रख दिया गया।स्कूलों और अस्पतालों पर भी हमले हुए,जिनमें मासूम बच्चे मारे गये ।

मिडिल ईस्ट में कोई देश अब सुरक्षित नहीं :-

उधर ईरान ने पड़ौसी देशों को निशाना बना रखा है जो अमेरिका का आज भी साथ दे रहे हैं। ईरान ने साफ कर दिया है कि वह मिट जाएगा लेकिन पीछे न हटेगा। यूएई को सबसे अधिक क्षति हो रही है। उसका अरबों डॉलर का पर्यटन उद्योगग बर्बादी की कगार पर है। प्रति वर्ष लगभग 110 अरब का पर्यटन लाभ कमाने वाला यह देश आज बुरे दिन गिन रहा है। बहरीन ,कतर के तेल ठिकानों पर तेज आक्रमण ईरान ने शुरू कर दिए हैं।
युद्ध की दिशा हर पल बदल रही सफेद फास्फोरस से हमला :-

युद्ध हर दिन दिशा बदलता रहा तो अब ईरान पड़ोसी देशों और इजरायल के जल प्लांटों पर हमले शुरु करेगा,इजरायल ने लेबनान में उग्रवादियों, हिजबुल्ला पर,' सफेद फास्फोरस"(खतरनाक केमिकल) से हमला किया है ,जिसका विश्व मानवाधिकार संस्था वर्ड वॉच ने भी विरोध किया है।यह बहुत नाजुक दौर खड़ा हो गया है। जहां बड़े स्तर पर समुद्री खारा पानी मीठा किया जाता है।ऐसा करके वह पानी की एकएक बूंद के लिए तरसा देगा।उधर होमरूज जल डमरू मध्य को बंद करके उसने पूरी दुनिया का तेल सप्लाई ठप्प कर दिया है। ईरान के युद्ध का प्रभाव पूरी दुनिया पर पड़ रहा है। शेयर बाजार की हालत गम्भीर है।महंगाई का असर हर ओर दिखने लगा है। पाकिस्तान जैसा देश तो घुटने पर आ गया है तेल की कीमत आसमान पर पहुंच गई है। 114 डॉलर प्रति बैरल दाम बढ़ गए हैं।
हालत नाजुक , भारतीय नागरिकों की सुरक्षा का प्रश्न:-

इन हालातों में तो यह लग रहा है कि यदि इस महायुद्ध का कोई समाधान न ढूंढा गया तो बहुत बड़ी बर्बादी दुनिया के सामने शीघ्र आने वाली है।कई देशों में आर्थिक आपात स्थिति लागू हो सकती है।हर देश को इस संकट में संकीर्ण राजनीति की जगह संकट का सामंजस्य दिखाना चाहिए।
इस युद्ध में भारत किसी पक्ष के साथ परोक्ष या अपरोक्ष रूप से नहीं जुड़ा है।सबसे पहले हर दल,हर नेता को मिडिल ईस्ट में फंसे लाखों कामकाजी ,और पर्यटक भारतीयों की सुरक्षा प्राथमिकता होना चाहिए। देश की संप्रभुता को झुकने नहीं दिया जाएगा।