विवादास्पद हॉर्मूज के विकल्प में भारत लाएगा समुद्र के अंदर से गैस लाईन:( डॉ प्रदीपसिंह राव, वरिष्ठ अंतर्राष्ट्रीय राजनीतिक विश्लेषक)

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विवादास्पद हॉर्मूज के विकल्प में भारत लाएगा समुद्र के अंदर से गैस लाईन:( डॉ प्रदीपसिंह राव, वरिष्ठ अंतर्राष्ट्रीय राजनीतिक विश्लेषक)

विवादास्पद हॉर्मूज के विकल्प में भारत लाएगा समुद्र के अंदर से गैस लाईन:( डॉ प्रदीपसिंह राव, वरिष्ठ अंतर्राष्ट्रीय राजनीतिक विश्लेषक)

Update24x.in:-

रतलाम ।  युद्ध विराम के दूसरे दौर में तीन शर्तें ईरान  ने  अमेरिका  को भेजी हैं, पहला परमाणु कार्यक्रम पर कोई रोक नहीं, दूसरा हॉर्मूज से अमेरिका नियंत्रण छोड़े  तीसरा सैन्य दबाव कम करे और क्षति पूर्ति करे।ईरान के विदेश मंत्री  अराघची  नई वैश्विक कूटनीति खेल रहे हैं।उन्होंने पाकिस्तान के बाद ओमान और फिर रूस के राष्ट्रपति से बात की है ।पुतिन ने साफ कहा है कि वो ईरान के साथ है।

 ट्रंप की ज़िद्द और आर्थिक संकट:- 

 

   उधर  तथाकथित '"असली "गोली कांड के बाद ट्रंप के तेवर ढीले नहीं हुए हैं। ऐसा लग रहा जैसे कुछ हुआ ही नहीं।ईरान की शर्तों को वो शायद ही मानेंगे।  ट्रंप परमाणु कार्यक्रम तो नहीं चलने देंगे। उन्होंने ईरान को सिर्फ तीन दिन दिये हैं कि वो पहले हॉर्मूज से नियंत्रण हटाए,तभी आगे कोई बात होगी।   यदि ऐसा न किया तो अमेरिका पूरी ताकत से कब्जा कर लेगा।अब सारी दुनिया एक बार फिर आर्थिक संकट से घिर गई है।ट्रंप को झुकना नहीं है और ईरान को हॉर्मूज और परमाणु कार्यक्रम छोड़ना नहीं है। जिद्द की जंग अब फिर महाजंग में बदल रही है।

भविष्य में  भारत को हॉर्मूज की जरूरत ही न पड़ेगी!!:-

 

 सारी दुनिया इस प्रतिबंध से  घोर संकट में पड़ गई है।भारत कई सालों से समुद्री रास्ते से ओमान से गुजरात पोरबंदर बंदरगाह तक मध्यपूर्व की तेल गैस सप्लाई की योजना पर काम कर रहा है।इस योजना का नाम "मिडिल ईस्ट टू इंडिया डीप वॉटर पाईप लाईन (MEIDP)"है।पहले यह सऊदी अरब से यूएई होते हुए ओमान लाई जाएगी,जो गैस  लाईन या परिवहन से लाई जाएगी जो ओमान के "अल_जिफ़ान"तट से अरब सागर में गहरे तल में उतार कर भारत के गुजरात के पोरबंदर तट  तक अंदर ही अंदर पहुंचाई जाएगी  ।   

 बड़ी चुनौतियां और खतरे:-

  इस योजना पर लगभग 40,0000करोड़ से  अधिक(अनुमानित)खर्च होंगे। 12000से 20000 किमी की दूरी तक समुद्र के अंदर पाईप लाईन बिछाने के लिए उच्च तकनीक से विक्निटीयर्स को  काम करना होगा।2023 में" SAGE साउथ एशिया गैस इंटरप्राइजेस"ने यूएई से यह समझौता किया है,जो खाड़ी के 2500 ट्रिलियन क्यूबिक फीट TCF के अकूत गैस भंडार से सप्लाई होगा।यदि यह योजना फलीभूत होती है,तो भारत को प्रतिवर्ष 7000 करोड़ से अधिक का फायदा होगा और दाम भी सस्ते होंगे। यह गैसरिफाइन हो कर प्राकृतिक गैस भंडारों तक लाई जा सकती है।ब्रिटेन की "डीप वाटर पाईप लाईन कंपनी "इस पर   सेज कंपनी के साथ काम कर रही है।यदि सब कुछ कुशल मंगल रहा,तो 2030तक यह योजना सफल हो सकती है।तब तक ट्रंप की ज़िद्द इस लंबे तनाव को किस मोड़ तक ले जाती है पता नहीं!!!