ट्रंप को खुद पता नहीं कि वो जंग को किधर ले जा रहे हैं ??              (डॉ प्रदीपसिंह राव, वरिष्ठ अंतरराष्ट्रीय राजनीति विश्लेषक)

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ट्रंप को खुद पता नहीं कि वो जंग को किधर ले जा रहे हैं ??              (डॉ प्रदीपसिंह राव, वरिष्ठ अंतरराष्ट्रीय राजनीति विश्लेषक)

Update24x.in:-

रतलाम।   ईरान पर हमले के आज  28दिन पूरे हो गए,यह अभी तक हॉर्मूज में ही लटका हुआ है।ट्रंप ने युद्ध के  अब तक के  तीन चरणों में एक भी सफलता हासिल न की है। उनकी रणनीति इतनी कमजोर क्यों है।पहले चरण में उसने अचानक वार्ता के  बीच ही हमले शुरू कर दिए और प्रमुख लीडर को मार दिया,कुछ न मिला,दूसरी लाइन के  लीडर  तैयार हो गए,अमेरिका परस्त कोई नेता न साथ आया न जन विद्रोह हुआ, फिर दूसरे चरण में अमेरिका इजरायल ने ईरान के परमाणु ठिकाने नष्ट  करने के लिए सैकड़ों हमले किए,कुछ न हुआ उसने यूरेनियम पहले ही सुरक्षित कर लिया है।

तीसरे चरण में भी सफलता की कोई उम्मीद नहीं:-

  अमेरिका ने तीसरे चरण में   समर्थन मांगा,निराशा हाथ लगी,हॉर्मूज पर नियंत्रण का प्रयास किया अब तक कुछ हासिल न हुआ,,ईरान की भौगोलिक स्थिति ही ऐसी है कि उसके संकरे  गलियारे में कोई दखल न दे सकता,उसकी अनुमति के बिना कोई परिंदा भी पर नहीं मार सकता। अब तक अमेरिका कई  लड़ाकू विमान खो चुका है और  भारी आर्थिक संकट उसके ही देश में  खड़ा हो गया है।  

 जमीनी युद्ध की सनकी योजना,:-

  

        अमेरिका अब समुद्री रास्ते से जमीनी युद्ध के लिए तैयारी कर रहा,100000दैनिक भेज दिए,लेकिन पहले ही चरण में ईरान के दस लाख  सैनिक तैयार खड़े हो गए,जो चींटी की तरह अमरीकी सैनिकों को मसल देंगे,,उसे वियतनाम और अफगानिस्तान का  कटु अनुभव याद करना चाहिए!! तो अब ट्रंप क्या करेंगे,बार बार युद्ध विराम करके अपनी असफल रणनीति  बनाने और हर दिन अलग अलग दावे और बयान देने से उनकी वैश्विक रेटिंग गिरती ही जा रही। अमेरिका इजरायल  इस युद्ध  में बुरी तरह फंस चुके है और पूरी दुनिया को उन्होंने बहुत भयंकर आर्थिक संकट में ला  खड़ा किया है !!ट्रंप दुनियाभर के दोस्तों से कटते जा रहे,!!जर्मनी,ब्रिटेन,फ्रांस,आस्ट्रेलिया तटस्थ हो कर आलोचना कर रहे। खाड़ी के देश मजबूरी में अमेरिका के वस्त लेकिन पीठ पीछे उसे कोस ही रहे।ईरान अपने मित्र देशों को तेल गैस दे कर एक नया शक्ति केंद्र बना रहा।इसमें भारत,पाकिस्तान,चीन, रूस,इराक,यमन ,जापान,उतरी कोरिया  सहित अनेक देश हैं। रस चीन का पूरा अपरोक्ष सहयोग ईरान को है और रक्षा कवच भी।!!इजरायल से भी रिश्ते अब खास न रहे।तो क्या दुनिया का सुपरपावर देश घुटने टेक देगा? ऐसा नहीं उसके पास प्लान बी है,और वह ईरान के आसपास के द्वीपों पर कब्जा करेगा।उसने तेल सप्लाई के लाल सागर के रस्ते को घेरने की योजना बना ली है और ईरान के पावर प्लांट ध्वस्त करने का इरादा पक्का कर लिया है।

ईरान की घातक योजना:-

    ईरान भी कम नहीं,वो हॉर्मूज भी न खोलेगा और" बा अल मंददेब,गलिया"रे को भी कब्जे में रखेगा,यह लाल सागर की ओर जाता है और अभी 12%व्यापार उस ओर से होता है।इस पर अमेरिका की नजर है,तो ईरान ने साफ कर दिया है कि यदि ऐसा किया तो वो लाल सागर के भीतर से जा रही इंटरनेट केबल को काट देगा।ऐसा हुआ तो इंटरनेट बंद हो जाएंगे और ऑनलाइन पेमेंट भी रुक जाएंगे।भारत को बड़ा नुकसान होगा।

अमेरिका के अगले कदम क्या होंगे:-

 चक्रव्यूह में फंस चुके सुपर पावर अमेरिका को किसी भी कीमत पर इस युद्ध में कदम वापसी मंजूर न होगी।न वो कोई  ऐसा समझौता करगा जिसमें ईरान की जीत नजर आए।उसका एक भी कदम पीछे होता है तो दुनिया ईरान को कंधे पर बैठा लेगी।ईरान खाड़ी देशों का नेता बन जाएगा।इस युद्ध में ईरान ने" चेकमेट "तो दे दी है,अब अमेरिका अपने राजा को इस चाल से कैसे बचा सकता है,यह देखना रोचक होगा।