क्या अमेरिका की जनता ही निर्णायक सिद्ध होगी(डॉ प्रदीपसिंह राव, वरिष्ठ अंतर्राष्ट्रीय राजनीतिक विश्लेषक )
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क्या अमेरिका की जनता ही निर्णायक सिद्ध होगी(डॉ प्रदीपसिंह राव, वरिष्ठ अंतर्राष्ट्रीय राजनीतिक विश्लेषक )
Update24x.in:-
रतलाम। 31दिनों से चल रहे अ समाप्त युद्ध का अब निर्णायक मोड आ सकता है,अमेरिका ने अपनी सारी ताकत ईरान पर झोंक दी है।अंतिम चरण में अपने 500000सैनिक ईरान के हॉर्मूज और खार्ग द्वीप पर कब्जा करने के लिए तत्पर हैं।मरीन और नाविकों सहित,विशेष पैराशूट दस्ते कभी भी उतर सकते हैं जो हॉर्मूज पर और परमाणु ठिकाने पर आक्रमण करेंगे।
जमीनी युद्ध के लिए उतरे अमेरिकी सैनिक:-

इनकी ताकत वियतनाम और अफगानिस्तान में भेजे गए सैनिकों से चार गुना अधिक है।ट्रंप का कहना है कि ये करो या मेरी तरह गुरिल्ला युद्ध लड़ सकते है।लेकिन ईरान का कहना है कि" तू डाल डाल तो मैं पात पात " ..!!उसके 10लाख सैनिक तैयार बैठे हैं,मैदान में ईरान को परास्त करना बेहद टेढ़ी खीर होगा।
इजरायल की हवा निकली :-

दूसरी ओर इजरायल लगातार कमजोर पड़ता जा रहा है।हिजबुल्ला ने उसकी कमर तोड़ दी है ,लगातार युद्ध के लिए इजरायल के पास अब सैनिकों की कमी हो गई है।अमेरिका का सपोर्ट लगभग न के बराबर रह गया है ।
अब जनता का ईरान युद्ध रोकने के लिए जंगी प्रदर्शन:-

अमेरिका में 50 राज्यों में 80 लाख के लगभग आम जनता ने खुला विरोध शुरू कर दिया गौर ईरान के विरुद्ध युद्ध बंद करने की अपील की है।इजरायल सहित 16देशों में ईरान युद्ध को समाप्त करने के लिए जनता सड़क पर उतर आई है।

व्हाइट हाउस बौखला गया है और ऐसे प्रदर्शन को गीदड़ भभकी बता रहा है।ट्रंप बुरी तरह फंस गए हैं और उनके गले में जो हड्डी फंसी है वो न उगलते बन रही न निगलते बन रही है।इस युद्ध को अमेरिका की जनता ने आईना बता दिया है,कहीं यह दबाव ट्रंप को इस्तीफा देने पर मजबूर न कर दे।सारी दुनिया जान गई है कि महाशक्ति का दंभ भरने वाला अमेरिका यह युद्ध मानसिक रूप से हार चुका है।उसका ईरान जैसे दुर्गम रणक्षेत्र में सैनिक उतारना एक और ऐतिहासिक भूल साबित हो जाएगा।