हाथियों ने खंडवा से इंदौर तक खींचा था रेल इंजन,लंदन के अखबार में छपी थी खबर, (इंदौर आज और कल,रोचक इतिहास, डॉ प्रदीपसिंह राव)
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हाथियों ने खंडवा से इंदौर तक खींचा था रेल इंजन,लंदन के अखबार में छपी थी खबर, (इंदौर आज और कल,रोचक इतिहास, डॉ प्रदीपसिंह राव)
Update24x.in:-
रतलाम। इंदौर को किसी भी कोने से देखें,इतिहास के कितने भी पन्ने पलटें, सौ, दो सौ, तीन सौ,चार सौ,,,,,,,अतीत के हर लम्हे में होलकर का ही गुणगान है,उन्हीं का पराक्रम है। आज इंदौर जहां खड़ा है उसको नींव में होलकर के संस्कार हैं।उल्लेखनीय है कि 400 वर्ष पूर्व इंदौर नहीं 'कम्पेल " परगना जो आज एक तहसील है, वहां से ही इंदौर और होलकर की कहानी शुरू हुई थी।1720 में कम्पेल से इंदौर में राजकाज आया।तब यहां कुछ न था,सिर्फ जमींदारों की जागीर थी।मराठों न कम्पेल के मुगल अमिल को उज्जैन खदेड़ दिया था।
जमींदार नदलाल थे इंदौर के पहले जमींदार:-

इंदौर में जमींदार नंदलाल चौधरी (जो बाद में मंडलोई कहलाए )की करो और खेती बाड़ी थी। उस समय इस जागीर में कपास और अफीम की बहुतायत थी। इंदूर को मराठों ने 1724से अपने अधीन लिया और शूरवीर मल्हार राव होलकर ने नींव रखी।इसकी समृद्धि कालांतर में अहिल्या बाई होलकर ने 1767से शुरू की।राजधानी महेश्वर को बनाया और इंदूर मालवा सूबे का सबसे धनी व्यावसायिक राज्य बन गया। इस अफीम के व्यवसाय को पूरे देश और विदेश तक लोकप्रियता मिल गई थी।इसे गतिशील बनाने के लिए तुकोजी राव होलकर द्वितीय ने अंग्रेजों को एक करोड़ रुपए का कर्ज 101वर्ष के लिए दे कर,ऐतिहासिक इंदौर खंडवा रेल लाईन की नींव रखवा दी।
रेलवे का रोचक इतिहास है इंदौर का:-

इस रेल लाईन का रोचक इतिहास, खबर उन दिनों 1875में "लंदन न्यूज पेपर"में सचित्र छपी थीं।इसमें बताया गया कि किस तरह हाथियों ने रेल इंजन को खींच कर इंदौर तक इसे पहुंचाया। जंगली हिंसक जानवरों के बीच पहाड़ों को काटना,नर्मदा पर पुल बनाया जाना जैसे दुर्गम कार्यों को पूरा करना अचरज लगता है। जब इनके चित्र द स्टेट्समैन ,और अन्य अखबारों में छपे तो उन्हें देखने के लिए हर चौराहे पर भारी भीड़ लग जाती थी। इंदौर सभ्यता की ओर अग्रसर था और करवट बदल रहा था। उस समय जो कुछ भी छपा,, वो दुर्लभ दस्तावेज के रूप में होलकर संग्रहालय,होलकर राजवंश गैलरी, राजबाड़ा में संजोया गया है।इसका "डिजिटलीकरण" किया जा रहा है।आप यहां मालवा अखबार सहित स्टेट गजट भी देख सकेंगे। इंदौर के पहले फोटोग्राफर

लाला दीनदयाल राजाजी इंदौर के पहले फोटो ग्राफर थे जिन्होंने ब्रिटिश हुकूमत से लेकर राजे रजवाड़े और निजाम को भी अपनी कला से हतप्रभ कर दिया था, 1888 में उन्होंने इंदौर में पहला फोटो स्टूडियो शुरू किया था ,पद्मश्री फोटोग्राफर भालू मोढ़े ने दुर्लभ कैमरे और तस्वीरें संग्रहित की और सुतार गली में संग्रहालय बनाया। जिसमें 1860 से ली गई तस्वीरें और लगभग 60 दुर्लभ कैमरे रखे हुए हैं।।ऐतिहासिक राजबाड़ा का निर्माण,पूरे नगर में आलीशान बाग, कान्हं,सरस्वती नदी में नौकायन और नवलखा के नौ लाख पेड़ों का रोचक इतिहास ,फोर्ड कार का इंदौर में पहला आगमन, शास्त्री ब्रिज की पहली तस्वीर,रानी सराय की बसाहट की अखबारों में झलकियां अगले अंकों में देखने,पढ़ने की कोशिश करेंगे। खबरियों की खबर के इस कलम में इंदौर के रोचक इतिहास का वर्णन आना भी रोमांचक खबर ही तो है।