ईरान युद्ध अमेरिका के इतिहास की सबसे बड़ी भूल साबित होगा (डॉ प्रदीपसिंह राव, वरिष्ठअंतर्राष्ट्रीय राजनीतिक विश्लेषक)
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ईरान युद्ध अमेरिका के इतिहास की सबसे बड़ी भूल साबित होगा (डॉ प्रदीपसिंह राव, वरिष्ठअंतर्राष्ट्रीय राजनीतिक विश्लेषक)
Update24x.un:-
रतलाम। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी ने चेतावनी दी है कि हम सब बहुत बड़ी और भयावह स्थिति की ओर बढ़ रहे हैं।यदि इसी तरह तेल और गैस भंडारण पर हमले होते रहे तो अगले छः महीने से लेकर एक साल तक पूरी दुनिया पर ऊर्जा संकट घर जाएगा।यह इतना कष्टदायी होगा कि छोटे मोटे निर्धन देशों का तो अस्तित्व ही खतरे में आ जाएगा। ईरान युद्ध जिस उद्देश्य को लेकर शुरू हुआ था वह उससे भटक गया है।ईरान की परमाणु ताकत कम करने के नाम पर अमेरिका इजरायल ने अनायास ईरान पर हमले करके उनके धार्मिक प्रमुख और कई प्रमुख व्यक्तित्वों की जान ले कर अब उनके तेल गैस के ठिकाने को मिटा रहे हैं।
वैश्विक संकट की ओर बढ़ता युद्ध :-

यह वैश्विक संकट को बुलाने और मानवता पर कुठाराघात सिद्ध हो रहा है।ईरान की रणनीति को समझे बिना हमले का परिणाम यह है कि अमेरिका के सबसे जंगी जेट फाइटर विमान F/35 को ही ईरान ने हिट कर दिखाया है।यह 28000करोड़ का विमान है। अब तक उसके 16फाइटर विमान मारे गए हैं।अमेरिका इस युद्ध से 39ट्रिलियन डॉलर का कर्जदार हो गया है।अगले छः वर्षों तक अमेरिका को वित्तीय संकट का सामना करना पड़ सकता है।
,,,,,22दिनों में भी ईरान को कोई परवाह नहीं:-

,,,22दिनों के बाद भी ईरान ने हिम्मत नहीं हारी है।जबकि अमेरिका को सारी दुनिया कोस रही है कि ट्रंप ने पूरी दुनिया को वैश्विक तेल गैस के सबसे बड़े संकट में खड़ा कर दिया है।यदि यह संकट इसी तरह बना रहा तो कुछ छोटे गरीब देशों का अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा।अमेरिका और इजरायल के बीच मनमुटाव उभरने लगा है क्यों कि इजरायल ईरान के प्राकृतिक गैस भंडारों को नष्ट कर रहा है और उसकी रिफाइनरीज को ध्वस्त किए जा रहा है,इसी का बदला लेने के लिए ईरान ने कतर की रिफायनरी पर इतना बड़ा हमला किया है कि अगले छः साल तक एल एन जी उत्पादन पर बुरा असर पड़ता रहेगा। उधर अरब ने साफ बोल दिया है कि आने वाले समय में कच्चे तेल का भाव 180 डॉलर प्रति बैरल भी हो सकते है। यदि यह हालात बने तो पूरी दुनिया में हाहाकार हो जाएगा।
क्या युद्ध कभी भी दिशा बदल सकता है?

युद्ध की दिशा कभी भी अचानक पलट सकती है।ओमान जैसा देश बोलने लगा है कि अमेरिका ने यह युद्ध छेड़ कर बहुत बड़ी गलती की है।
अमेरिका और इजरायल के बीच खटपट शुरू:-

इजरायल का मकसद अमेरिका से अलग है,और वो चुन चुन कर ईरान के रणनीतिकारों को मार रहा है।सिर्फ कोई अनर्थ ही इस युद्ध को समाप्त करवा सकता है अन्यथा मध्य पूर्व के देशों की आत्मा की आवाज ही टर्निंग पॉइंट सिद्ध हो सकती है।तेल गैस पर जीवित खाड़ी देशों की संप्रभुता पर खतरा खड़ा हो गया है।ईरान ने बेहद चतुराई से सामना किया है और तेल गैस भंडारण और सप्लाई को नियंत्रित करके बड़ी चुनौती दी है,ईरान के पास अभी भी इतनी मिसाइल छुपी है कि वो आधी दुनिया को नष्ट कर सकता है,वह कई महीनों तक लड़ सकता है।यदि इजरायल की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरी ध्वस्त हो गई तो नेतनयाहू घुटने के बल आ जायेंगे।ईरान का संकल्प है कि वो इजरायल की कमर तोड़ देगा।ईरान के प्रमुख मुज्तबा ख़मनेई ने वीडियो संदेश देकर साबित किया है कि वो अभी जिंदा हैं,स्वस्थ हैं।
- ट्रंप ने अब आपा खोना शुरू कर दिया:-

उधर ट्रंप ने नाटो देशों को कायर बताया है और उन्हें संकट के समय साथ न देने पर दुत्कारा।अमेरिका के सबसे शक्तिशाली लड़ाकू विमान का ईरान द्वारा क्षति पहुंचना पूरी दुनिया को हतप्रभ कर रही है।अमेरिका को शंका है कि रूस या चीन ईरान को एयर डिफेंस में पीछे से सहयोग कर रहा है।ईरान की सैन्य क्षमता पर प्रश्न चिन्ह खड़ा हो रहा है। तथाकथित शांति के मसीहा ट्रंप को यदि अब मोदी फोन करें कि आप अब मेरी बात मान लें,ईरान पर हमले बंद कर दें,,तो क्या मान लेंगे।मान लें तो ही भला है अन्यथा इतिहास की सबसे बड़ी भूल के मार्ग पर ट्रंप चल पड़े हैं।
हमेशा हौसला जीतता है...!! :-

भारत के सुप्रसिद्ध गीतकार, संतोष आनंद ने एक बार अनेकों विपदाओं से गुजरने के बाद कहा था," हमेशा हौसला जीतता है,हथियार नहीं"!!!!दुनिया देख रही है,ऐसा ही होता दिखाई दे रहा है,,फिर कहे कोई भी अंजाम हो.....!!