रतलाम में जब दिलीपकुमार और हेमा मालिनी एक मंच पर आए(डॉ प्रदीपसिंह राव)

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रतलाम में जब दिलीपकुमार और हेमा मालिनी एक मंच पर आए(डॉ प्रदीपसिंह राव)

 रतलाम में जब दिलीपकुमार और हेमा मालिनी एक मंच पर आए(डॉ प्रदीपसिंह राव)

Update24c.in:-


 रतलाम! मार्च 1999 की वह ऐतिहासिक शाम, जब मांगल्य मंदिर में साकार हुई मां दुर्गा की शक्ति;सदी के  बेजोड़ कलाकार दिलीप कुमार की गरिमामयी मौजूदगी और आयोजन के पीछे छिपी यादें आज भी हैं जीवंत है।

 पिछले ही दिनों घर-घर में मातृशक्ति की आराधना  की है। रतलाम को बरसों से मां कालिका का सान्निध्य प्राप्त है। नवरात्रि के नौ दिनों आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक उल्लास से सजा यह उत्सव रतलाम की विशिष्ट पहचान है। लेकिन इसी सांस्कृतिक परंपरा से जुड़ी एक ऐसी ऐतिहासिक स्मृति भी है, जिसकी चर्चा होते ही मन रोमांचित हो उठता है। यह वह अवसर था, जब सुप्रसिद्ध नृत्यांगना और अभिनेत्री हेमा मालिनी ने रतलाम के    मांगल्य मंदिर  के मंच पर अपनी प्रसिद्ध नृत्य नाटिका ‘दुर्गा’ के माध्यम से साक्षात दुर्गावतार की अनुभूति करा दी थी।

मार्च 1999 की वह शाम केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं थी, बल्कि रतलाम के कला-इतिहास का अविस्मरणीय अध्याय थी। मांगल्य मंदिर के मुक्ताकाश मंच पर हेमा मालिनी की अद्भुत प्रस्तुति, मंच पर उज्जैन  से पधारे  शैलेंद्र  पाराशर (संचालन) के साथ भारतीय सिनेमा के  महान अभिनेता दिलीप कुमार की उपस्थिति और नगर के कला प्रेमियों का उत्साह _इन सबने मिलकर उस आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया था।

  दर्शकों को विश्वास ही न था कि वे सपना देख रहे हैं या सच है!!एक साथ दो दो हस्तियां!!इस आयोजन की परिकल्पना से लेकर ब्रोशर तैयार करने तक और मंच पर प्रारंभिक भूमिका निभाने तक मुझे भी सहभागी बनने का अवसर मिला था। आज 27 वर्ष बाद भी उस शाम की स्मृतियां मन में उसी ताजगी के साथ अंकित हैं।

 दुर्गा के रूप में नारी शक्ति का जागरण:-

आदिकाल से मां दुर्गा अदम्य साहस, पराक्रम और अन्याय के प्रतिकार की प्रतीक रही हैं। मातृशक्ति केवल करुणा, ममता और वात्सल्य का स्वरूप नहीं है, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर अन्याय के विरुद्ध प्रज्वलित होने वाली अग्नि भी है। उसकी आंखों में दया के आंसू हैं, तो अन्याय के विरुद्ध अदम्य साहस और संघर्ष की शक्ति भी है।हेमामालिनी की इस नृत्य नाटिका का उद्देश्य नारी सशक्तिकरण है,जिसके सैकड़ों स्टेज शो पिछले 30वर्षों से वो देश विदेश में के चुकी हैं।

रतलाम का सौभाग्य है,जो जिला प्रशासन और सामाजिक संस्थाओं के अथक प्रयासों से यह अभूतपूर्व सौगात मिल सकी।लगभग ढाई घंटे तक हेमामालिनी ने दुर्गावतार,और शिव तांडव की  बेमिसाल प्रस्तुति दे कर कला प्रेमियों को हतप्रभ कर दिया था।दुर्गा मंदिर से उनका सिंह की सवारी पर प्रकट होना,,अदभुत दृश्य था।  रमेश चोपड़ा जी रोटरी क्लब का सौजन्य,अंकलेसरिया जी चेतन्य कश्यप  अन्य समाज सेवियों के अनन्य सहयोग ने सपना साकार किया । दिलीप कुमार जैसी महान हस्ती का नगर आगमन इतिहास में  दर्ज हो गया। प्रो शैलेंद्र  पराशर,उनके शिष्य दीपक सक्सेना की तारीफ करते थक नहीं रहे थे,वहीं मेरी उनके साथ भूमिका से सब  गद  गद थे।ड्रीम गर्ल हेमामालिनी को स्वप्न सुंदरी के साथ भारतीय कला जगत की अनुपम उपमा देना भी कम होगा