ईरान के परमाणु ठिकाने पर हमले का भयावह परिणाम: (डॉ प्रदीपसिंह राव,वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक)
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ईरान के परमाणु ठिकाने पर हमले का भयावह परिणाम: (डॉ प्रदीपसिंह राव,वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक)
Update24x.in:-
रतलाम। ईरान युद्ध अब बेलगाम,अमानवीय और नृशंस रूप लेता जा रहा है। ईरान के परमाणु यूरेनियम के भंडार"नतांज"पर मिज़ाइल के हमले की आशंका,IAEA(अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी) ने दे दी थी।उसने साफ कहा कि तेहरान और उसके आसपास के कई बड़े शहरों के इलाकों को खाली करना पड़ेगा।ईरान के अधिकृत प्रशासन ने भी माना कि हमारे परमाणु ठिकाने "नतांज "पर हमला हुआ है।
परमाणु भंडारों का विकिरण,दूर तक प्रभाव होगा :-

ईरान के तीन प्रमुख न्यूक्लियर भंडार हैं,सबसे बड़ा "इस्फहान", "नतांज" और "फोर दो "। यह बेहद नाजुक और गम्भीर स्थित है।1945 के जापान के हिरोशिमा, नागासाकी के विकिरण की विभीषिका आज तक कोई न भूला होगा।यदि परमाणु विकिरण की खबर सही हो गई तो मध्य पूर्व के 100/150कि मी तक के क्षेत्र में तबाही मचेगी, तेल भंडार खतरे में पड़ जायेंगे पर्यावरण और जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो जाएगा । यदि युद्ध लंबा खिंच गया तो हॉर्मूज जलडमरू मध्य के रुके रास्ते मे लाखों बैरल तेल,निर्यात न हो सकेगा।इसका भीषण परिणाम आएगा।उग्रवादी हुती
(समुद्री डकैतों) ने चेतावनी दे दी है कि जो जहाज निकला वो डूबेगा।अभी 300जहाज फंसे पड़े हैं।हिजबुल्ला उग्रवादी भी चुप नहीं हैं जिन्हें ईरान का पोषण मिलता है।लेबनान इजरायल में इनका तनाव है।
एक अकेला ईरान 14देश बलवान:-

ईरान अकेला 14देशों अमेरिका,इजरायल,ब्रिटेन, फ्रांस,जर्मनी, यूएई,जॉर्डन,सऊदी अरब,कतर,कुवैत,,बहरीन,ईराक,सीरिया और ओमान का सामना कर रहा है,जो द्वितीय विश्व युद्ध में भी कभी देखना न मिला।बैलेस्टिक मिज़ाइल के भारी भंडार से ईरान अकेला इतने देशों से लोहा ले रहा है।
अमरीकन सैनिकों के बढ़ते ताबूत:-

ईरानी ड्रोन,और मिज़ाइल हमलों से अमरीकी मिलट्री बेस पर भारी तबाही मची है। इस में कई अमरीकी सैनिक मारे जा रहे हैं।
ये ताबूत जब अमरीका पहुंचेंगे तो जनाक्रोश बढ़ेगा।ब्रिटेन ने हिंद महासागर के सैनिक अड्डे "दियागोगरसिया "से अमरीका द्वारा हमले का विरोध किया है।अमेरिका स्तब्ध है।ब्रिटेन ने कहा मुस्लिम आबादी पर हमले के लिए यह अड्डा उपयोग न होगा क्यों कि ब्रिटेन में मुस्लिम आबादी बहुत है।यह स्थिति हर देश में आएगी क्यों कि धार्मिक नेता की शहादत रंग लाएगी।
मध्य पूर्व में मै स्वयं रहा हूं,हर देश देखे,बेहद समृद्ध और चमकीले।तेल से आर्थिक शक्ति की चकाचौंध बने इन देशों की आज हेकड़ी निकल रही है।कुवैत,आबुधाबी दुबई सब घुटने टेक रहे हैं।मध्य पूर्व का चेहरा ही विकृत हो गया है।
विश्व शांति के लिए कोई हितैषी नहीं बचा:-

यह अचरज की बात है कि द्वितीय विश्व युद्ध को रोकने के लिए सर्वमान्य समझौते विश्व मंच पर हुए।कई युद्ध शांतियां हुई।आज कोई सर्वमान्य शांति दूत नेता नहीं और न तटस्थ देश है,किसकी बात ट्रंप और नेतान्याहू मान ले। दुनिया की आर्थिक स्थिति पर पड़ रहे दुष्प्रभाव मानवता की और दुनिया की रक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय मान्यता का मंच जरूरी है जो अनधिकृत हमलों को रोक सके।अंतर्राष्ट्रीय कानून के अनुच्छेद 24और अनु 51की अमरीका ,इजरायल को कोई परवाह ही नहीं।सुरक्षा परिषद भी गूंगी बाहरी बैठी है।इसीलिए रूस और चीन दो टूक बोल रहे हैं कि अमरीका इजरायल द्वारा ईरान पर, निरंतर चल रही चर्चा के बिना परिणाम के ,एक तरफा हमला कर देना यह अंतर्राष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन है। युद्ध के अगले 5/6दिन बेहद भयंकर परिणाम वाले सिद्ध होंगे।(क्रमशः)