दो दिन चले अढ़ाई कोस,वैश्विक ऊर्जा संकट के सामने रोकना ही होगा युद्ध: डॉ प्रदीपसिंह राव (वरिष्ठ अंतर्राष्ट्रीय राजनीतिक विश्लेषक)

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दो दिन चले अढ़ाई कोस,वैश्विक ऊर्जा संकट के सामने रोकना ही होगा युद्ध: डॉ प्रदीपसिंह राव (वरिष्ठ अंतर्राष्ट्रीय राजनीतिक विश्लेषक)

Update24x.in:-

रतलाम ।  ईरान अमरीका युद्ध अब चौथे। सप्ताह में प्रवेश कर चुका है,और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका की रणनीति की भद्द पीट रही है,जी/7देशों ने भी कह दिया है कि यह" अ समाप्त ' युद्ध विश्व को भीषण ऊर्जा संकट की ओर ले जा रहा है।अंततः  इसको परमाणु विश्व युद्ध के मुहाने पर रोकना पूरे विश्व की जिम्मेदारी हो चुकी है। ट्रंप का ताजा बयान है कि "युद्ध का अंत या शांति सिर्फ ताकत से ही संभव है," उधर ईरान का कहना है कि" किसी भी प्रकार की धमकी या ऊर्जा ठिकानों पर एक तरफा हमलों का बदला उसी तरह लिया जाता रहेगा"।  

   रणनीति में  ईरान अमरीका से  चार कदम आगे:-

  यह बात अब अंतरराष्ट्रीय जानकारों को अच्छी तरह समझ आ गई है कि ईरान  23दिनों बाद भी अपनी सटीक रणनीति में कामयाब हुआ है, वह बहुत चतुराई से युद्ध लंबा खींचना चाहता है,ताकि सभी देशों का दबाव बढ़े,उसने  भारी से  भारी क्षति के बाद भी घुटने नहीं टेके हैं,और हॉर्मूज से अमेरिका,इजरायल को छोड़ सभी देशों को तेल ले जाने की अनुमति दे रखी है।।  

   क्या शांति समझौते की  कोई संभावना भी  है यक्ष प्रश्न!!

   

  अमेरिका ने संकेत दिए हैं कि अंत में किसी शांति समझौते पर तो पहुंचना ही होगा।इसके लिए कतर,मिस्र और यू के ने प्रयास शुरू कर दिए हैं।  शर्तें जो संभावित हैं,यह रहेंगी कि

1.ईरान को यूरेनियम संवर्धन को शून्य करना होगा।

2.ईरान को 5वर्षों के लिए मिसाइल कार्यक्रम को बंद करना होगा।

3.नतांज, इसफ़हान, फोर्डो में परमाणु कार्यक्रम रोकने या बंद करने होंगे।

4.हिजबुल्लाह,हुती और हमास जैसे आतंकी संगठनों को फंडिंग बंद करनी होगी।

5.क्षेत्रीय देशों के  साथ हथियार संधि(1000किमी) से अधिक दूरी की मिज़ाइल प्रक्षेपण न करने की संधि करनी होगी।    इनके अतिरिक्त भी शर्तों की प्रस्तावना बन रही है।

   शर्तों की प्रस्तावना  में ही उलझने हैं:-

      लेकिन ईरान इन शर्तों पर संधि के लिए तैयार न होगा,जब तक कि उसे समूचे नुकसान की क्षतिपूर्ति न दी जाए।हॉर्मूज पर किसी प्रकार के हमले न करने की गारंटी हो,खड़ी देशों से अमरीकी सेना,हथियार हटाए जाएं,उसके परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह रोका न जाए,अन्यथा  सभी देशों जैसे इजरायल,और मिडिल ईस्ट के आसपास के देशों  के परमाणु कार्यक्रमों पर भी रोक लगाई जाए।  

  अमेरिका जीत भी जाए तो वह उसकी साख खो चुका है:-

  ईरान अपने तेल के वर्चस्व को कभी छोड़ेगा नहीं,उसने यह भी बता दिया है कि उसकी मिज़ाइल मारक क्षमता यूरोप को भी निशाना बना सकती है। ईरान के पीछे अदृश्य   शक्ति चीन और रूस का हाथ है,जो अमेरिका का  प्रभाव कम करने की कसम खाए बैठे हैं। ईरान ने भी धमकी दी है कि हॉर्मूज के  पावर प्लांट पर अमेरिका ने हमला किया तो अंजाम बहुत बुरा होगा।इसलिए यह वार्ता  कई  सप्ताह चल सकती है

यदि शुरू हुई तो??

किसी न किसी "अल्प विराम "तक तो पहुंचना ही होगा, क्योंकि विश्व का कोई देश,इजरायल को छोड़ कर,युद्ध नहीं चाहता।क्यों कि महंगाई और तेल गैस के संकट को और अधिक न झेला जा सकेगा।अमेरिका इस युद्ध में जीत भी जाए तो वह अपनी साख को तो खो चुका है।उसे हासिल क्या हुआ है,सिर्फ इजरायल ने अपना उल्लू सीधा किया है!!!!