मूल्यनिष्ठ पत्रकारिता का तीर्थ इंदौर(वरिष्ठ लेखक डॉ प्रदीपसिंह राव)
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इंदौर की पत्रकारिता का इतिहास
मूल्यनिष्ठ पत्रकारिता का तीर्थ इंदौर(वरिष्ठ लेखक डॉ प्रदीपसिंह राव)
Update24x.in:-
रतलाम/ इंदौर। इंदौर का नाम आते ही एक सभ्य और सांस्कृतिक नगर की छवि सामने आ जाती है।जो इंदौर में जन्मा ,पढ़ा, बस गया ,यहां रहा वो आजीवन नहीं भूल पाता वो इंदौर को अपनी पुण्य भूमि मानता है। इसके पत्रकारिता का इतिहास इतना गौरवपूर्ण है कि जिसने सान्निध्य लिया वो धन्य हो गया।पुराणों ,ग्रंथों ,वेदों, ऋचाओं को पढ़ने में जो असीम संस्कारिक आस्था का आभास होता है ,वैसा ही यहां की पत्रकारिता का इतिहास ,संदर्भ जानकर गर्वोक्ति का आभास होता है।
177 वर्ष पुराना है इतिहास पत्रकारिता का

6मार्च 1849 को "मालवा अखबार"के प्रथम प्रकाशन से इंदौर की पत्रकारिता का शुभारंभ हुआ था।भाषागत एकता का इतना ध्यान रखा गया कि इसके आधे पृष्ठ पर हिंदी और आधे भाग पर उर्दू में समाचार छपते थे।इसके पहले संपादक पंडित धर्मनारायण थे,जो मालवा की पत्रकारिता के जनक कहे जा सकते हैं। होलकर स्टेट के छापेख़ाने में प्रकाशित होने वाला यह अखबार बहुत लोकप्रिय हुआ और 4आने में बड़ी मात्रा में बिकता था।तब इस कीमत में 5 सेर गेहूं आ जाता था।
अंग्रेज अधिकारी हेमिल्टन का योगदान

ब्रिटिश रेजिडेंट हेमिल्टन ने इसे प्रोत्साहन दे कर प्रसारित किया । 1875 , 36वर्ष तक प्रकाशित होते रहने के बाद यह बंद कर दिया गया। अंग्रेजों को संदेह था कि स्वतंत्रता संग्राम 1857 की अग्नि को यह प्रज्वलित न कर दे।फिर भी 1875 तक यह अखबार छपता रहा।शेख कमरुद्दीन छापाखाना के प्रबंधक थे और वे मालवा की पत्रकारिता के पहले प्रकाशन विशेषज्ञ,प्रबंध संपादक कहे जा सकते हैं और इस अखबार में महाराजा होलकर द्वितीय की शादी के रोचक वर्णन से ले कर ,राजाओं का इतिहास,इंदौर की जनता की संख्या,नदियां और जंगल के एक एक वृक्ष की जानकारी आती रहती थी।सप्ताह में एक दिन मंगलवार को मालवा अखबार निकलता,जिसकी बेसब्री से प्रतीक्षा होती थी ।
जूनी इंदौर उस समय की पहली बस्ती थी।तब खपरैल के कितने मकान और कुछ पक्के मकान की संख्या ,मर्द,औरत,बच्चे,हिंदू,मुस्लिम की संख्या भी छपती थी।काफी मोटे अक्षरों के कारण कमजोर आंखों वाले पाठक भी इसे आसानी से पढ़ते थे और इंदौर के आसपास के कस्बों ,रियासतों तक ये अखबार पहुंचता था।जहां भी अखबार जाता,उसे पढ़ने के लिए समूह में बैठ कर ब वाचन होता था होता था। एक साक्षर पाठक अनपढ़ श्रोताओं की भीड़ को पढ़ कर सुनाता था।यहीं से पत्रकारिता अंकुरित हुई और ये पौधा कालांतर में वटवृक्ष बन गया।यह भी शोधार्थियों ने बताया है कि इस अखबार में मराठी समाचार ,सूचनाएं भी प्रकाशित होती थी,जो बड़ी संख्या के महाराष्ट्रीयनों के लिए बहुपयोगी होता था। व्यापार,मंडी,,क्रय,विक्रय,अपराध,कानून की बातें भी बकायदा प्रकाशित होती रही।होलकर राजाओं ने पत्रकारिता की इस अनुपम शुरुआत से समूचे मालवा में बौद्धिक,वैचारिक ,सांस्कृतिक वातावरण को बल प्रदान किया।यह मालवा की संस्कृति का ऐतिहासिक प्रमाण है।