आर एस एस में महिला वर्ग की सशक्त भूमिका के 90वर्ष (डॉ प्रदीपसिंह राव वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक)

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आर एस एस में महिला वर्ग की सशक्त भूमिका के 90वर्ष (डॉ प्रदीपसिंह राव वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक)

आर एस एस में महिला वर्ग की सशक्त भूमिका के 90वर्ष (डॉ प्रदीपसिंह राव वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक)

Update24x.in:-

रतलाम।  राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के 2025 में सौ वर्ष पूर्ण हो गए, 1936 में स्थापित "राष्ट्र सेविका समिति" ने राष्ट्र चेतना  में उल्लेखनीय भूमिका निभाई है।शताब्दी वर्ष मे संघ ने महिलाओं को संगठनात्मक  पदों पर लाने और निर्णय लेने में और  नेतृत्व में भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया गया है। इस दिशा में अगले कुछ वर्षों में पद और सत्ता के मोह से दूर महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में संघ के लिए समर्पित सेविकाओं को जोड़ने के लिए अभियान तेज़ होगा।

लक्ष्मी है केलकर की प्रेरणा:-


राष्ट्र सेविका समिति ,लक्ष्मीबाई केलकर की प्रेरणा से दशहरे के  दिन 1936 में   गठित हुई थी  जो स्वतंत्र महिला विंग  बनी।इस ढांचे में वैचारिक आधार  यह था कि परिवार,समाज और राष्ट्र की सेवा करना "स्त्री धर्म"है।सेविका समिति  ने व्यापक रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में बालिकाओं को शिक्षा, संस्कार,शारीरिक,वैचारिक ज्ञान देने का अभियान चलाया।यह शाखा पद्धति का कार्य है।संघ के इस ढांचे में यह शाखा  निरंतर  महिलाओं  में आत्मनिर्भरता,साहसिक आचरण,शिक्षा और सामाजिक जागरूकता के संस्कार दे रही है।"राष्ट्र सर्वोपरि "की भावना के साथ हिन्दू जागृति,पथ संचलन,शाखा और बौद्धिक के भी निरंतर आयोजन हो रहे हैं।महिलाओं को बड़ी संख्या में राष्ट्र भक्ति के लिए प्रेरित करने के लिए मंच बन रहे हैं।              
शास्त्र और शस्त्र का प्रशिक्षण:-

दशहरे पर और नवरात्रि में शस्त्र पूजा और शस्त्र संचालन की गतिविधियां देखी जा सकती हैं।यही नहीं बौद्धिक क्षेत्र में उच्च शिक्षित महिलाएं भी आगे आ रही हैं जिन्हें संगठित किया जा रहा है।महिला विदुषियों ने भी रुचि दिखा कर "संघ के सौ वर्ष "जैसी पुस्तक लिख कर साबित किया है कि हम भी  राष्ट्र भक्ति मे किसी से कम नहीं!!!1939 में पहली बार समिति ने प्रशिक्षण वर्ग आयोजित कर राष्ट्रवादी विचार का प्रचार प्रसार किया और  आजादी के  आंदोलन में सामाजिक सांस्कृतिक  गतिविधियों के माध्यम से  कार्य किया। 1940से 1970 तक स्वतंत्रता के बाद नेटवर्क बढ़ता रहा।सरस्वती आप्टे  ने केलकर की मृत्यु 1978के बाद प्रमुख संचालिका बनी।1975/77में आपात कल में भी समिति ने बढ़ चढ़ कर भाग लिया। 2006में  प्रमिला ताई  मेढे ने नेतृत्व किया। 2012में वेंकट शानथक्का राष्ट्र संचालिका बनी।


800से ज्यादा जिलों में  हैं  शाखाएं:-


अब पूरे राष्ट्र में  800से अधिक जिलों में  3500शाखाएं फैल चुकी हैं।जिनकी हजारों   सदस्य बन चुकी हैं। दुनिया के सबसे बड़े संगठन आर एस एस की लोकप्रियता पूरे देश मे बढ़ रही है।इसी के सहयोग से घर घर में संस्कारों की अलख जगाने का  कार्य युद्ध स्तर पर  चल रहा है।स्कूली पाठ्यक्रमों में भारत की ऐतिहासिक महत्ता को समझने के लिए व्यापक सुधार जरूरी हैं। बच्चों में भीहिलाओं के साथ साथ आर एस एस की शाखाओं में रुचि आती जा रही है।यह राष्ट्र जागृति की दिशा में अनुकरणीय कदम है।जय राष्ट्र!!