75वर्ष बाद वो सुबह तो आएगी ,जब नर -नारी समानता आएगी:( डॉ प्रदीपसिंह राव, वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक)
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75वर्ष बाद वो सुबह तो आएगी ,जब नर -नारी समानता आएगी:( डॉ प्रदीपसिंह राव, वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक)
Update24x.in:-
रतलाम । नर नारी समानता के अधिकारों के लिए 1951में पंडित नेहरू की कैबिनेट में कानून मंत्री डॉ भीम राव अम्बेडकर ने हिंदू कोड बिल रखा था जो पारित नहीं हुआ।इस अंतर्विरोध के चलते अम्बेडकर ने 27सितंबर 1951 में इस्तीफा दे दिया। आंबेडकर आज से 76वर्ष पूर्व ही चाहते थे कि महिलाओं को समानाधिकार मिले।उनके सपनों को साकार करने की पहल मोदी सरकार करने जा रही है ।

यदि सबकुछ आशाओं के अनुकूल रहा तो आगामी लोक सभा चुनाव में परिसीमन के बाद महिलाओं को 33%सीटों पर चुनाव लड़ने का अधिकार मिल जाएगा और लगभग ,273सीटें महिलाओं के लिए लोकसभा में आरक्षित हो जाएंगी।(1952में मात्र 4.4%सीटें मिली महिलाओं को) 1952में मात्र 24महिला संसद थी जो कुल सीटों का 4.4%थीं।अब संसद के विशेष सत्र में 134वां संविधान संशोधन पारित हो गया तो इतिहास बदल जाएगा लोक सभा की 543से बढ़कर 850सीटें हो जाएंगी,जिस पर परिसीमन के बाद 2029का लोक सभा चुनाव होगा। विधान सभाओं में भी सीटें भी बढ़ जाएंगी जिससे सारा देश नारी स शक्तिकरण में अग्रणी होगा।बिल पास तभी होगा जब विपक्ष भी साथ दे। 50%से अधिक वोटिंग पर निर्भर करेगा । दो तिहाई बहुमत के लिए वोटिंग अधिक से अधिक होना जरूरी है।रह आसान नहीं है ।
विकसित भारत के सपने को लगेंगे पंख:-

विकसित भारत के 2047के विजन में नीति निर्माण में महिलाओं की लोकतांत्रिक भागीदारी जरूरी है।प्रधानमंत्री ने इसके लिए देश की सभी नारियों से आग्रह किया है।हर वर्ग की ,हर क्षेत्र की नारियों को यह स्वर्णिम अवसर प्राप्त होगा करवट बदलते देश को ,महिलाओं के अधिकारों के लिए महिलाओं की और हर राजनीतिक दल के बहुमत की जरूरत है।यह बेहद अफसोस की बात है कि कुछ राजनेतिक दल अपने निजी स्वार्थ के कारण इस बिल के विरोध करने का वातावरण तैयार कर रहे हैं।लेकिन नारियों को भी अब अपनी अस्मिता के संघर्ष के लिए आर पार की लड़ाई लड़ने को तैयार रहना चाहिए।