ब्रिटेन के टैंक जब इंदौर की सड़कों पर  परेड करने आ गए थे!!!!!!(डॉ प्रदीपसिंह राव,)

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ब्रिटेन के टैंक जब इंदौर की सड़कों पर  परेड करने आ गए थे!!!!!!(डॉ प्रदीपसिंह राव,)

ब्रिटेन के टैंक जब इंदौर की सड़कों पर  परेड करने आ गए थे!!!!!!(डॉ प्रदीपसिंह राव,)

Update24x.in:-

रतलाम।  इंदौर की मूल्य निष्ट पत्रकारिता के इतिहास पर चलते चलते इंदौर की पृष्ठभूमि  इसके  गौरवशाली इतिहास  को जानना भी जरूरी था,जरूरी है,..,।   जितना पीछे जाऊं,, इतिहास उतना ही गहरा होता जाए...!! इसकी रोचकता ने मुझे शोध परख अनुसंधान की ओर आकर्षित कर दिया। एक एक लाईन लिखने में घंटों लगते हैं।आज 400/500  साल पीछे जाना बहुत कठिन और दुः साध्य कार्य है।  

इंदौर में  होलकर के  पहले कदम:- 

   जब 14जन 1761में पानीपत का तीसरा युद्ध हुआ,तब  मराठा सेना से मल्हारराव होलकर सेनानायक के रूप में  लड़े।उन्होंने ही मराठाओं के परिवार को बचाया।कालांतर मे यही बहादुर 1732 में इंदौर में होलकर शासन का संस्थापक बना। 294वर्ष पूर्व इंदौर जब इन्दु र  बना ।  शोध ग्रंथों और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण अभिलेखागार के चल रहे अनुसंधान में और होलकर के गजट में इतिहास संदर्भ में इंदौर के   नामकरण के प्रथम संस्थापक राष्ट्रकूट राजा इंद्र(914/929)10 वी सदी का जिक्र आता है।उन्होंने इस निर्जन लेकिन निर्मल भूतल पर पड़ाव डाल कर  उज्जैन  महाकाल  को जीतने की मन्नत मांग कर इंद्रेश्वर महादेव की स्थापना ,इंदौर की खान(कान्हा) व सरस्वती नदी के किनारे की थी,तब से यह इंद्रपुरी कहलाया।इसके कई वर्षों बाद जब होलकर मराठा आए तो  मराठी में" इंदूर" नाम पड़ गया।ब्रिटिश शासकों ने बाद में  इसे इंदौर नाम दिया।    यह राज्य निरंतर प्रगतिशील रहा।

पूरा जीवन छावनी और युद्ध के  मैदानों में गुजरा:-

    1732से 1766तक सूबेदार  मल्हार राव होलकर ने  युद्ध और साहस के शौर्य से इंदौर की नींव मजबूत की।उन्होंने पूरी जिंदगी छावनियों में गुजारी और होलकर साम्राज्य की सीमा का चुनौतियों में विस्तार किया।       इतिहास और पुराने अखबार ,पुस्तकों के पन्नो में संस्थापक मल्हार राव को सबसे शौर्यवान राजा के रूप में सम्मान दिया जाता है।  इन्हीं की वजह  से इंदौर  को गौरवशाली विरासत मिली।          

    अहिल्या माता ने किया मालवा को संस्कारशील:-

    1767से 1795तक अदम्य साहस और बुद्धिमत्ता की परिचायक  अहिल्या बाई होलकर  ने शासन चलाया और महिला सेना का निर्माण कर कई युद्ध लड़े ,भारतीय धर्म संस्कृति को अभूतपूर्व स्थान पर स्थापित किया।1797से 1811तक यशवंत राव होलकर ने इंदौर को अनेक आक्रमणों के बावजूद ध्वस्त नहीं होने दिया।उनकी मृत्यु के समय होलकर तृतीय 4वर्ष के थे।उनकी माता और दीवान ने राजकाज संभाला।      

       होलकर राज्य हुआ अंग्रेजों के अधीन :-

 आंग्ल मराठा युद्ध के बाद मंदसौर में संधि के बाद होलकर ब्रिटिश शासन के अधीन हो गए और आजादी तक ब्रिटेन ने सत्ता संचालन के निर्देश होलकरों को दिए।  6जनवरी 1818से इंदौर ब्रिटिश रेजिडेंसी के मातहत चलता रहा।तभी अंग्रेजों ने   महू को ब्रिटिश सेना की छावनी बनाया। इसके बाद उल्लेखनीय होलकर शासक तुकोजीराव द्वितीय का ही माना जाता है। 1844से 1886 तक उनके ही शासन में इंदौर की पत्रकारिता ने नींव रखी थी।

21अप्रैल 1873को होलकर स्टेट का पहला गजट प्रकाशित हुआ:-

      स्टेट का पहला आधिकारिक गजट प्रकाशित हुआ था जिसने इंदौर की ऐतिहासिक विरासत,जन जीवन,आर्थिक सामाजिक , धार्मिक,सांस्कृतिक गतिविधियां,,कृषि,व्यापार सबका उल्लेख होता था और होलकर साम्राज्य के मानचित्र और उस समय के दुर्लभ चित्रों का प्रकाशन होता था।इसी शासन काल में 1857कि क्रांति भी हुई और मालवा में हस्तलिखित पर्चे क्रांतिकारियों   निकाला करते थे।तुकोजीराव 1886तक रहे।शिवाजी राव1903तक राजा रहे और तब तक इंदौर से अखबार और पुस्तकें भी निकलना शुरू हो चुके थे। 1903से तुकोजीराव तृतीय ने नए इंदौर के विकास को गति दी जिसे यशवंतराव होलकर ने 1926से1948तक मालवा की सबसे समृद्ध रियासत बना दिया था।

 ब्रिटिश के युद्ध टैंक और बख्तरबंद एंबुलेंस पहली बार  आए इंदौर :-

इस समय की रोचक घटनाओं में  द्वितीय विश्व युद्ध के समय ब्रिटिश टैंक की  इंदौर की सड़कों पर परेड थी और महू में ब्रिटिश एंबुलेंस का आना था।इन्हें यहां की प्रजा ने पहली बार देखा था। ब्लैकआउट का तथा बमबारी के समय एहतियात का अभ्यास होता था।

 आजादी के पहले   मालवा अखबार के बाद भी निकलते थे अखबार:-

   भारत भरत,नव युग ओर इंदौर समाचार आजादी के पहले  इंदौर से निकलने वाले अखबार थे,,और आजादी के ठीक पहले 5जून 1947को नईदुनिया जैसा अखबार इंदौर की पत्रकारिता की व्याकरण बन कर स्थापित हुआ था।अगले चरणों में हम इन्हीं की पृष्ठभूमि से निकले अनेक पत्रकारों और समाचारों की बानगी प्रस्तुत करेंगे ,,आप यह भी जानेंगे कि नवलखा में सचमुच नौ लाख पेड़ थे जिनकी गिनती गजट में आती थी और खान नदी का नौकायन और रेसीडेंसी  एरिया में बहता हुआ पानी।अनोखी   अनछुई इंदौर की  दास्तानें । किंवदंतियां। उस समय के जीवित नागरिक जो आज 96/100 की उम्र  में इंदौर  के अतीत की कहानियां बताते हैं