कहीं ग़ालिब, कहीं मीरा, कहीं रसखान है भारत 

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 कहीं ग़ालिब, कहीं मीरा, कहीं रसखान है भारत 

 

 कहीं ग़ालिब, कहीं मीरा, कहीं रसखान है भारत 

 "ग़ज़लों में आशीष" आयोजन में स्वर श्रंगार की सुरीली पेशकश 

Update24x.in:- 

 रतलाम। कोई पूछे तो हमसे किस क़दर धनवान है भारत , कहीं ग़ालिब , कहीं मीरा , कहीं रसखान है भारत,....... प्यार की बारिश में आज नहाया जाए, दिल के हर दर्द को आज भुलाया जाए..... और ऐसी कई ग़ज़लों से गुलाब चक्कर की शाम सराबोर हो गई। अवसर था अपनी स्थापना के 38 वर्ष पूर्ण कर रही संस्था स्वर श्रंगार द्वारा आयोजित "ग़ज़लों में आशीष " कार्यक्रम का । शहर के युवा रचनाकार आशीष दशोत्तर की ग़ज़लों की प्रस्तुति से संगीतमय हुआ वातावरण शहर को यह संदेश भी दे गया कि अपने घर के रचनाकार की सुध लेने से शहर समृद्ध होता है।  संगीतकार अशफ़ाक जावेदी के संयोजन में प्रस्तुत ग़ज़ल निशा का यह कार्यक्रम शहर की जीवंत साहित्य और संगीत की संस्कृति को ताज़ा कर गया। 

 बारह रागों में निबद्ध ग़ज़लें गाई

आशीष दशोत्तर द्वारा लिखित और संगीतकार अशफ़ाक जावेदी द्वारा बारह रागों में निबद्ध बीस से अधिक ग़ज़लों को कलाकारों ने अपनी आवाज़ में प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। राग यमन में नयन सुभेदार और रानी शर्मा की आवाज़ में सरस्वती वंदना से शुरू हुआ सुरीला सफर ग़ज़लों के ज़रिए ज़िन्दगी के फलसफे पेश करता गया। राग भोपाली में ग़ज़ल " होते हैं नए लोग " (आशीष मेहता ), राग अहीर भैरव में " इसमें न कुछ कमी करना " (संजय परसाई 'सरल' ), राग कलावती में "कोई पूछे कि हमसे" (अल्फिया ख़ान), राग पूर्वी में " महज इक खेल" (नयन सुभेदार ), राग भैरवी में "किया तो हमने कभी"( रानी शर्मा ) , "ये जो मगरूर आदमी" (जलज शर्मा), राग तोडी में " प्यार की बारिश में" ( अशफ़ाक जावेदी ), राग कलावती में "कभी सूरत से तो " (अल्फिया खान), राग दरबारी में निबद्ध "खिले गुलाब" ( नयन सुभेदार ) , राग अहीर भैरव में " जहां जैसा मिला " (रानी शर्मा ) , "ज़माना हो गया " (जलज शर्मा ) तथा राग यमन में निबद्ध ग़ज़ल " ले के आया है मुक़द्दर" 
(अशफ़ाक जावेदी ) ने प्रस्तुत की। राग पूर्वी में ग़ज़ल " देख ले झूठा तेरा डर"  (संजय परसाई 'सरल'), शिवरंजनी में " निभाते हैं रिश्ता नया" (नयन सुभेदार) और राग अहीर भैरव में ग़ज़ल " पड़ेगा अंधेरों ने तुम्हें " (जलज शर्मा) ने प्रस्तुत कर समां बांधा। संगत वसीम खोइया, तल्लीन त्रिवेदी, शादाब जावेदी ने की। संचालन दुर्गेश सुरोलिया ने किया। 

 नई ऊर्जा देता आयोजन 

जनसंपर्क अधिकारी शकील ख़ान ने कहा कि ऐसे आयोजन सुकून देते हैं। इरफान खान ने आयोजन को सुखद बताया। 
वरिष्ठ रंगकर्मी कैलाश व्यास ने इस अवसर को शहर के लिए अनुपम बताते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन ऊर्जा देते हैं और शहर की युवा पीढ़ी को प्रेरणा । विनोद झालानी ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम आज की आवश्यकता है। अनुनाद संस्था अध्यक्ष अजीत जैन, सुनील निरंजनी ने आशीष दशोत्तर का सम्मान किया। 

 इनकी मौजूदगी रही

आयोजन में वरिष्ठ रचनाकार प्रो. रतन चौहान , रंगकर्मी ओम प्रकाश मिश्रा , कैलाश व्यास , विनोद झालानी , अश्विनी शुक्ला, आई.एल. पुरोहित, नरेंद्र सिंह डोडिया, विनोद संघवी, कीर्ति शर्मा, पत्रकार रमेश सोनी ,रविंद्र उपाध्याय, मीनाक्षी कौशल , अनुनाद के अध्यक्ष अजीत जैन, कुलदीप शर्मा, नरेंद्र सिंह शेखावत, आरिफ़ मंसूरी, मनोज सोलंकी, जयेश शर्मा, धनंजय तबकड़े, निसार पठान,  मनोज जोशी, घनश्याम मकवाना, सुहास चितले , विजेन्द्र सिंह सिसौदिया,नरेंद्र सिंह चौहान सहित सुधिजन मौजूद थे।