सिंहासन खाली करो कि जनता आती है ....

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सिंहासन खाली करो कि जनता आती है ....

सिंहासन खाली करो कि जनता आती है ....

(द्रोहकाल में नेपाल,बेकाबू हो  थे पड़ोसी देश नेपाल  पर टिप्पणी)

*डा प्रदीपसिंह राव ,अंतरराष्ट्रीय राजनीति के  समीक्षक*.    

Update24x.in:-

रतलाम।  एशिया में श्रीलंका,बांग्लादेश और अब नेपाल में  सत्ता के  विरुद्ध क्रांति ने समूचे विश्व को स्तब्ध कर दिया है। नेपाल की आग बुझी भी नहीं है को यूरोप में फ्रांस में  सरकार  की नीतियों  के विरुद्ध युवाओं  ने क्रांति कर दी है।नेपाल में दर्जनों युवाओं की जान चली गई ,सैकड़ों घायल है,पूरा नेपाल ध्वस्त हो रहा है, हर ओर आगजनी और रख के  ढेर लग गए।सरकार और व्यवस्था के विरुद्ध 13से 28वर्ष के युवाओं का संगठन ," झेन ज़ी (Gen-Z) "ने सर पर कफ़न  बांध लिया है।विद्रोहियों ने भ्रष्टाचार और सत्ता के विरोध में अपनी जान झोंक दी है।नेपाल के काठमांडू में अब तक  की यह सबसे  बड़ी क्रांति है।4सितंबर से जबसे सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाया गया,तब से युवाओं का आक्रोश चल रहा था।लेकिन 8और 9को प्रदर्शन और भड़क गया जब प्रधानमंत्री ओली  ने उग्रता को दबाया।हिंसा और फिर गोली चलने से युवाओं की मौत से विद्रोह और भड़क गया।सता के अस्तित्व को ही जमीदोज कर देने के जुनून में युवाओं ने संसद भवन और सिंह दरबार शासन संचालन स्थल, न्यायालय ,मीडिया केंद्र सब कुछ जला कर  तबाह कर दिया। वित्त मंत्री ,विदेश मंत्री,हत्थे चढ़ गए  उनको दौड़ा दौड़ा कर जनता ने   पीटा।लोकतंत्र का मंदिर खाक हो गया,अब सरकार  कानून कहां बनाएगी। दिशा हीन क्रांति में  अराजकता  दबे पांव शामिल हो गई। वहां अब युवाओं को किसी नेता,पार्टी पर भरोसा नहीं है।,240वर्ष का राजतंत्र समाप्त हुआ था, पिछले  17साल में 15बार सत्ता परिवर्तन हुआ है।अब लोकतंत्र पर भी भरोसा नहीं क्यों कि सत्ताधारियों ने इसे  भोगतंत्र बना दिया था। जिस देश में  युवा शक्ति को गुमराह किया जाता है,रोजगार  नहीं दिया  जाता ,वहां उनका आक्रोश कभी न कभी सीमाएं  तोड़ ही देता है।सेना भी बैकफुट पर है।  प्रधान मंत्री के पी शर्मा ओली सहित सभी खौफजदा नेताओं ने इस्तीफा दे दिया है। ओली 4बार सता से  बाहर हो चुके हैं।इसके  बाद भी जनाक्रोश थमा नहीं है। युवाओं  को  नर संहार के बदले सभी मंत्री,नेताओं को सजा देने की मांग  की जा रही है,।   राज तंत्र  लोकतंत्र से अच्छा था,ऐसा लोग कह  रहे।   लोकतंत्र  जैसी व्यवस्था की नेपाल जैसी दुर्गति संसार में  और कहीं नहीं मिलती।कुछ युवाओं ने भारत से भी उम्मीद जताई है,प्रधान मंत्री मोदी  की सराहना की और ये कहा है कि प्रधान मंत्री  ओली यदि भागे तो भारत शरण न दे।एक लाख युवाओं  को जोश में अब होश नहीं है । ऐसा कोई नेतृत्व उभर कर सामने नहीं आ रहा जो नियंत्रण कर ले।अंततः सेना को ही भरोसा जताना होगा।संवैधानिक संकट के इस बेहद चिंताजनक समय में  सत्ता शून्य नेपाल में  नागरिक सरकार, आम जनता का शासन, राजतंत्र या सेना का शासन ही विकल्प हैंआज की स्थिति में  नेपाल जीरो ग्राउंड की तरह हो चुका है। खाली केनवास पर  नई इबारत लिखनी होगी। जोश और आक्रोश में राष्ट्रीय संपत्ति को जिस तरह से नष्ट कर दिया गया है  उस उजड़े हुए  बर्बाद देश को आर्थिक रुप से मजबूत करना री कंस्ट्रक्शन  करना अनुभव हीन नेतृत्व के बस का नहीं होगा।साम्यवादी प्रभाव से मुक्त फिर से वास्तविक लोकशाही की स्थापना एक दीर्घ कालीन प्रक्रिया रहेगी। अफगानिस्तान में  कई वर्ष तक  विप्लव को भारत ने देखा,रूस का विखंडन देखा,पाकिस्तान की अ स्थिरता देखी जा,लेकिन अब आत्म दाह कर रहे  इस देश से सभी लोकतांत्रिक सरकारों को सचेत हो जाना चाहिए।जो  भी नेता लोकतंत्र को ,अपनी  निजी  पूंजी बटोरने की स्वायत्तता का साधन बना कर,  सत्ता  को निजी  संपत्ति  बनाने की भूल  कर रहे हैं उन्हें नेपाल की तरह ही भविष्य में जनता सबक दे सकती है। रामधारी सिंह दिनकर  ने स्टीक लिखा था,सिंहासन खाली करो कि जनता आती है!!